नीलम जासूस

आ गया है वापस लोकप्रिय सहित्य का सुनहरा दौर, दिग्गज लेखकों के क्लासिक नोवेल्स उपलब्ध है… यानी नई बोतल में पुरानी शराब | 

नीलम जासूस कार्यालय की स्थापना १९५९ में लाला सत्य पाल वार्ष्णेय ने की थी। वेद प्रकश कम्बोज और जनप्रिय लेखक ॐ प्रकाश शर्मा के प्रति माह उपन्यास छपा करते थे और बेहद लोकप्रिय थे। आज के लोकप्रिय उपन्यासकार सुरेंद्र मोहन पाठक का भी पहला उपन्यास नीलम जासूस कार्यालय से ही प्रकाशित हुआ था। बाद में कुमार कश्यप का भी पहला नावेल नीलम जासूस में प्रकाशित हुआ। अब यही संस्था दोबारा आपकी सेवा में आ गयी है।

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